फिरोजपुर
फिरोजपुर भारत के पंजाब प्रदेश का एक छोटा सा शहर है जो सतलुज के किनारे बसा है और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर है। इसका नाम और इसकी उपस्थिति से ही संकेत मिलता है कि इसकी स्थापना किसी मुस्लिम की होगी। मुस्लिम संस्कृति में बसे शहर के चारों तरफ दीवार और दरवाजे होते हैं। फिरोजपुर में भी ऐसे 10 दरवाजे हैं: दिल्ली दरवाजा, कसूरी गेट, मखू गेट आदि। सब कुछ सहज है कि महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल में सतलुज अंग्रेजी साम्राज्य की सीमा थी। इससे पहले भी फिरोजपुर में सतलुज के किनारे व्यापार का महत्वपूर्ण संकट होगा। ब्रिटिश सरकार ने भी इसका पूरा महत्व दिया। अंग्रेजों ने यहां महत्वपूर्ण छावनी बनाई और रेलवे स्टेशन बनाए।
ऐसा लगता है कि फिरोजपुर में सभी धर्मों के लोगों ने योगदान दिया है। फिरोजपुर में हर गली कूचे में मंदिर और गुरुद्वारे दावा करते हैं कि इस हिंदू और सिख संस्कृति में कितनी रची मची है। शहर के बीचों बीच आर्य समाज का भव्य मंदिर है। ईसाइयों ने यहां मिशन हॉस्पिटल बनाया है। शेरशाह के मजार की बहुत मान्यता है।
फिरोजपुर शहर में तीन महत्वपूर्ण बस्तिया हैं: दर्ज बलोच, दर्ज कंबोज, दर्ज भट्ठियां। बलोच, भट्टी तो शायद अब नहीं रहे लेकिन कंबोज यहां के किसान हैं और ईमानदार और मेहनतकाश हैं। शहर के अंदर खाने, हीरा खाने और दाना पीने से पता चलता है कि यह व्यापार की खरीदारी कर रहा है।
फिरोजपुर में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सहदेव को ब्रिटिश सरकार ने फांसी दी थी और उनकी समाधि है। फिरोजपुर में सारागढ़ी के शहीदों का भी समाहार है। सारागढ़ी की लड़ाई सिख रेजीमेंट की बहादुरी का अद्भुत प्रमाण है। सारागढ़ी की लड़ाई में तो सिख अंग्रेजों की ओर से सेना के तौर पर लड़ाई लड़ी थी। लेकिन एक लड़ाई में सिखों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, जिसमें उन्हों ने अंग्रेजों को खुशी दी थी। फिरोजपुर का यह जंगी मैदान भी बगल में ही है। बीकानेर के राजा गंगा सिंह ने ब्रिटिश सरकार से समझौता किया जिस के तहत फिरोजपुर के पास सतलुज पर बांध लगा कर राजस्थान के लिए गंगा नहर निकाली गई जिस से राजस्थान का श्रीगंगानगर से बीकानेर तक के इलाके में सिंचाई है और बहुत बड़ा भूभाग रेगिस्तान की चपेट से और अनधिकृत हो गया।
फिरोजपुर में भारतीय रेल का विभागीय कार्यालय भी है। दिल्ली से सीधी रेलवे लाइन रोहतक बठिंडा के रास्ते यहां तक आती है और देश की सब से पुरानी एक्सप्रेस रेलगाड़ी पंजाब मेल फिरोजपुर से दिल्ली, आगरा, भोपाल होते हुए मुंबई तक 2000 किलोमीटर का सफर तय कर जाती है। फिरोजपुर का रेल लिंक जलंधर के रास्ते जम्मू और लुधियाना के रास्ते कलकत्ता से भी है। एक रेल लिंक फाजिल्का तक भी है।
किसी ज़माने में फिरोजपुर जिले का क्षेत्रफल बहुत बड़ा था। मोगा, जीरा, फरीदकोट, फाजिल्का, अबोहर, मुक्तसर, मलोट सब फिरोजपुर जिले का ही भाग थे।
फिरोजपुर के सपूत देश के बहुत उच्च कोटि के पदों पर आसीन रहे हैं जैसे कि जनरल जेजे सिंह, भारतीय सेना के अध्यक्ष और गवर्नर अरुणाचल परदेश, जस्टिस एमएम पूंछी, चीफ जस्टिस आफ इंडिया, श्री आर एम अग्रवाल, एंबेसडर, श्री सरबजीत सिंह विर्क, डीजीपी पंजाब, श्री महल सिंह भुल्लर, डीजीपी पंजाब इत्यादि। फिरोजपुर के दो खिलाड़ी देश की उन हॉकी टीमों के सदस्य रहे हैं जिन टीमों ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते।
इन सब के पीछे हाथ रहा है यहां की शिक्षण संस्थानों का। सनातन धर्म स्कूल, सिख कन्या महाविद्यालय, देव समाज स्कूल और कॉलेज, राम सुख दास कॉलेज, हिंदू गर्लस सैकंडरी स्कूल कुछ ऐसे शिक्षा संस्थान हैं जो करीब 100 वर्ष पूरे कर चुके हैं या करने जा रहे हैं। इन शिक्षा संस्थानों को स्थापित करने में फिरोजपुर के दानवीर परिवार रहे जैसे सांवलका परिवार, श्री मुन्नी लाल अग्रवाल। इन में उम्दा पढ़ाई के पीछे यहां के अध्यापक और प्रोफेसर। प्रिंसिपल भीम सैन, मास्टर मोहन लाल जी, हिस्टोरियन श्री हरि राम गुप्ता जी, प्रिंसिपल ए एन शर्मा, प्रोफेसर के एस गिल, प्रोफेसर एम एल आनंद, प्रोफेसर बी डी नैथानी, प्रोफेसर कश्यप, प्रोफेसर चमन लाल जी अरोरा। यह कुछ ऐसी शासियते हैं जिन्हों ने फिरोजपुर के युवक युवतियों को सही मार्गदर्शन दिया।
आजकल फिरोजपुर में कोई ऐसा बड़ा व्यापार, उद्योग या संस्था नहीं जिस में युवा वर्ग को अच्छी नौकरी मिले। इस लिए अधिकांश युवा यहां से बाहर चले जाते हैं। परंतु मैं नमन करता हूं उन को जिन्होंंने फिरोजपुर में रह कर अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ किया। इन में से एक उम्दा उद्धाहरण है डॉक्टर कमल बागी। डॉक्टर बागी ने यहां इतना बढ़िया हस्पताल बनाया है कि यहां के लोगों को इलाज के लिए लुधियाना चंडीगढ़ नहीं भागना पड़ता। डॉक्टर कमल के पिताजी श्री सत्य पाल जी बागी फिरोजपुर के ऐसे पत्रकार थे जिन की देश के अतिविशिष्ट समाचार पत्रों में साख थी।
इसी तरह से मैं नमन करता हूं उन को जो अच्छी अच्छी पोस्ट से रिटायर हो जाने के बाद भी वापिस फिरोजपुर में ही बस्ते हैं या यहां आते जाते रहते हैं। उद्धहरण के तौर पर श्री शाम लाल गक्खर जो पुलिस में बहुत बड़े अफसर रहे और अब फिरोजपुर के लोगो की काफी सेवा कर रहे हैं।
फिरोजपुर के कुछ और होनहार सपूत हैं जिन्होंं ने व्यापार और उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लुधियाना, जलंधर, दिल्ली में ऐसे कई परिवार हैं। मुझे गर्व है कि सनातन धर्म स्कूल में मेरे एक सहपाठी चंदर प्रकाश जिन के परिवार ने भोपाल में एक उद्योग स्थापित किया है जिस में भारतीय रेल के लिए डीजल इंजन और अन्य कई सामान बनाए जाते हैं।
फिरोजपुर में नारी शक्ति में प्रिंसिपल मधु प्राशर का नाम महत्वपूर्ण है। आप ने देव समाज कॉलेज का सफल नेतृत्व लगभग तीन दशक तक किया। देव समाज कॉलेज को इससे पूर्व प्रिंसिपल धर्मवीर जी ने नेतृत्व प्रदान किया जिस को लोग अभी तक याद करते हैं।
आजकल फिरोजपुर को सुंदर बनाने के कुछ प्रयास चल रहे हैं। दिल्ली गेट, बगदादी गेट इत्यादि को फिर से बनाया गया है। मैं नमन करता हूं उनको जिन्हों ने यह करना शुरू किया है।
सतीश कालड़ा
बैंगलोर
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